Monday, January 14, 2019

Makar Sankranti in Rajasthan 2019

सोशल मीडिया और शहरी शैली में सिमटा जीवन अतीत की रंग बिरंगी दुनिया को धूमिल नहीं होने देता। इसके साथ ही आज मकर सक्रांति का पुराने दिनों का त्यौहार कई रूपों में याद आ रहा है जैसे,
1. भरी ठंड में सूर्योदय से पहले ठंडे पानी से नहाना( जिसे गधा उतारना कहा जाता था मान्यता यह कि जो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में नहीं नहाया वह वर्ष पर्यंत स्वच्छता की दृष्टि से गधा ही रहेगा)
2. इसके बाद घर के आंगन में गेहूं और तिल के लड्डू का ढेर रखना और आने वाले पुजारी पुरोहितों में बांटना,
3. मां के हाथ का बना ज्वार का दिव्य स्वाद वाला खिचड़ा ,
4. गांव की बहन बेटियों के साथ बुलावे पर दूसरे घरों में जाकर खिचड़ा खाना.
5. अपने बेटे वत्सल का पतंग के लिए जुनून लेकिन देखते ही देखते सब बदल गया है अब सक्रांति के नाम पर व्हाट्सएप पर थिरकते मैसेज हैं या रस्म अदायगी के लिए अपने ही घर में बनाई गई खिचड़ी! तसल्ली बस यह है कि बढ़ते बच्चे ने पतंग और मंजा लूटने के लिए बेकाबू होकर छत और उसकी मुंडेर पर भागना बंद कर दिया है!! नए जमाने ने जीवन को बहुत सुविधाजनक बना लिया है लेकिन बहुत कुछ छीना भी है। आप सब को मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं-